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Satellite internet kya hai

Satellite internet kya hai क्यूँ है इतना खास जानिए ?

Satellite internet kya hai क्यूँ है इतना खास जानिए ? या सैटलाइट इंटरनेट क्या है और यह कैसे काम करता है इससे जुड़ी सारी जानकारी आज इस आर्टिकल में हम जानेंगे। अगर आज के समय की बात की जाए तो कोई भी यह नहीं कह सकता है कि वह इंटरनेट का इस्तेमाल नहीं करते है क्योंकि आज के समय यह हमारी जरूरत बन गई है।

इसी को ध्यान में रखते हुए सैटलाइट इंटरनेट ब्रॉडबैंड की खोज की गई है जिससे हमें तेज इंटरनेट की सुविधा मिल सके और खासकर गांव के लोगों को भी इंटरनेट की सुविधा मिले।

Satellite internet सुनते या पढ़ते ही हम सभी के मन में यह सवाल आता है कि यह सेटेलाइट से संबंधित है और क्या यह हमें internet signal सेटेलाइट के माध्यम से देगा तो यह बात सच है हमें इंटरनेट की सुविधा सेटेलाइट के द्वारा दी जाएगी।

Satellite internet kya hai क्यूँ है इतना खास जानिए ?

जिस प्रकार मौसम का हाल-चाल लेने के लिए विभिन्न देशों द्वारा मौसम सेटेलाइट लांच किया जाता है जिससे मौसम का पता लग सके ठीक उसी प्रकार अब इंटरनेट की सुविधा लोगों को देने के लिए सैटलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल भी हो रहा है और सैटलाइट इंटरनेट को लॉन्च करने के लिए सबसे जरूरी चीजें निम्नलिखित हैं

  • Orbit

Orbit यानी कक्ष जिसमें हमारे ग्रह ( planet ) उपग्रह ( satellite ) घूमते हैं यह गोलाकार की तरह होते हैं जिसके अंदर हमारे सेटेलाइट भी इसी के अंदर घूमते हैं जो मुख्य रूप से सेटेलाइट को पृथ्वी के चारों ओर घुमाते हैं।

  • Satellite

इसी सेटेलाइट की मदद से हम सभी सैटलाइट इंटरनेट या सेटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं और सेटेलाइट को हिंदी में हम सभी उपग्रह के नाम से जानते हैं जैसे पृथ्वी का उपग्रह चांद है।

  • Geostationary satellite internet

यह orbit पृथ्वी की सतह से 35,786 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है इस कक्ष के अंदर भी सेटेलाइट को लॉन्च किया जाता है सबसे खास बात यह है कि यह पृथ्वी का चक्कर उतने ही समय में लगा लेता है जितनी समय में पृथ्वी अपने कक्ष या ऑर्बिट पर अपना चक्कर लगाता है।

यह बहुत पहले के समय से ही यह सेटेलाइट चला आ रहा है यह मुख्य रूप से कुछ चुनिंदा कंपनियों और सरकार द्वारा चलाए गए कुछ संस्थाओं के पास इसकी सुविधा रहती है।

  • Low earth orbit satellite internet

इसी ऑर्बिट के अंदर सेटेलाइट वाले इंटरनेट को लॉन्च किया जाता है क्योंकि यह पृथ्वी की सतह से 200 किलोमीटर से 2000 किलोमीटर तक की दूरी तक सेटेलाइट को लांच किया जाता है जिससे ज्यादा इंटरनेट स्पीड लोगों तक पहुंचाई जा सके।

  • Latency

जब भी हम इंटरनेट पर कुछ भी सर्च करते हैं तो वेबसाइट खोलने में जितना समय लगता है या हम कह सकते हैं कि वेबसाइट कितने समय में खुल जाता है इसी समय को हम latency कहते हैं।

लेटेंसी को हम यह भी कह सकते हैं कि यूजर के एक्शन और वेबसाइट या ऐप के बीच के response  या जवाब को हम latency कह सकते हैं और इसको मिली सेकंड में चेक किया जाता है या मापा जाता है साथ में इसका ping test से किया जाता है जिसे हम कंप्यूटर में भी चेक कर सकते हैं।

PUBG

उदाहरण के तौर पर हम समझ सकते हैं कि जब हम PUBG खेलते हैं और खेलते समय हमें कोई टारगेट दिखता है जिसे हमें गोली मारनी होती है मगर हमसे टारगेट मिस हो जाता है या टारगेट हमें ही गोली मार देता है तो यह latency के कारण ही होता है अगर लेटेंसी अच्छी होती है तो हमारा टारगेट कभी नहीं मिस होता है हमें लगता है कि इंटरनेट slow चल रहा है यह मुख्य कारण latency का ही होता है।

Satellite internet क्या है ?

Satellite internet की बात की जाए तो यह Satellite internet broadband के नाम से भी जाना जाता है और आसान भाषा में  internet service provider कहा जाता है जो अंतरिक्ष से उपग्रह ( satellite ) की मदद से डाटा सिग्नल भेजता है जिसकी मदद से हमारा इंटरनेट चलता है।

सैटलाइट इंटरनेट हमें बहुत अच्छी इंटरनेट स्पीड देता है यह हमारे data signal को अंतरिक्ष में स्थित सेटेलाइट या उपग्रह की मदद से हमारे घर पर लगे dish की मदद से हमें इंटरनेट की सुविधा देता है यह डिश हमारे घर के टीवी डिश की तरह ही काम करता है।

सैटलाइट इंटरनेट का इतिहास क्या है ? History of Satellite Internet

जब भी कोई खोज या इन्वेंशन की बात होती है तो सबसे पहला नाम अमेरिका का आता है लेकिन इसमें अमेरिका थोड़ा पीछे रह गया है क्योंकि सबसे पहला पृथ्वी के कक्ष में सेटेलाइट छोड़ने वाला देश सोवियत यूनियन है जिसे आज के समय हम सभी RUSSIA के नाम से जानते हैं इन्होंने sputnik नमक सेटेलाइट 1957 में छोड़ी थी।

उसके बाद दूसरा सेटेलाइट अमेरिका द्वारा 1958 में छोड़ा गया था जिसे हम सभी satellite explore 1 के नाम से जानते हैं उसके बाद अमेरिका ने तीसरा सेटेलाइट 1962 में Telstar नामक सेटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ी थी जो नासा की तरफ से पहला satellite television broadcast है।

सैटलाइट इंटरनेट को किसने खोजा है ?

जैसा आप सभी जानते हैं कि आधुनिकता के इस युग में सबसे बड़ा योगदान अमेरिका का भी है और इन्हीं के द्वारा 1993 में Hughes Aircraft Company के द्वारा सैटलाइट इंटरनेट लाइसेंस के लिए अप्लाई किया गया था और 2005 Spaceway नामक सैटेलाइट अंतरिक्ष में छोड़ा गया था जिससे लोगों को इंटरनेट सुविधा सेटेलाइट के माध्यम से दी जा सके।

सैटलाइट इंटरनेट कैसे काम करता है ? How Satellite Internet Works

यह सवाल हम सभी के मन में जरूर आया होगा कि यह कैसे काम करता है यह ठीक broadband fibre connection की तरह काम करता है जिस प्रकार ब्रॉडबैंड फाइबर कनेक्शन में ऑप्टिकल फाइबर की जरूरत पड़ती है इंटरनेट डाटा users तक या उपयोगकर्ताओं तक भेजने के लिए जिससे हम सभी इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ठीक उसी प्रकार सैटलाइट इंटरनेट में भी हमें यह सुविधा देखने को मिलती है इसमें फर्क इतना रहता है कि इसमें किसी भी cable wire या optical wire की जरूरत नहीं पड़ती है यह इंटरनेट Data Signal सेटेलाइट की मदद से सभी यूजर्स के पास भेजता है जिससे हमारा इंटरनेट चलता है।

NOC क्या है ?

NOC ( Network operation centre ) यह नाम से ही लगता है कि इंटरनेट पर जो भी चीज मौजूद रहती है इसी के माध्यम से हम तक पहुंचती है तो चलिए जानते हैं कि कैसे यह सैटलाइट इंटरनेट में काम करती है।

जब भी हम कुछ भी अपने ब्राउजर में जानकारी सर्च करते हैं तो हमारे mobile signal या computer signal वह डांटा सिग्नल आपके डिश एंटीना के पास सिग्नल जाता है और वह signal रेडियो सिग्नल में बदलकर 186,000 miles per second की स्पीड से सेटेलाइट के पास डाटा सिग्नल मैसेज के रूप मे भेजता है।

जो हम ने जानकारी सर्च किया होता है और वह सिग्नल NOC के पास जाता है और ठीक रिवर्स गियर में हमारी जानकारी हमारे डिश एंटीना तक उसके बाद हमारे मोबाइल सिग्नल या कंप्यूटर सिग्नल के पास पहुंच जाती है वह भी 1 सेकेंड के अंदर हमारे पास पहुंचा देती है।

Satellite internet  broadband  में मदद करने वाले भाग

यह भाग्य मुख्य रूप से बड़ी भूमिका निभाते हैं सैटलाइट इंटरनेट या सैटलाइट इंटरनेट ब्रॉडबैंड की सुविधा लोगों तक पहुंचाने के लिए जिससे उनका इंटरनेट की स्पीड और तेजी से चल सके।

  • Dish

यह हमारे dish tv एंटीना की तरह ही काम करता है और इसका आकार भी डिश एंटीना की तरह ही रहता है यह हमारे डाटा सिग्नल को सेटेलाइट तक पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से काम करता है।

  • Modem/router

डिश पर जो भी सिग्नल सेटेलाइट द्वारा दिया जाता है वह मॉडम या राउटर के पास आता है जिससे हम इंटरनेट चलाते हैं। दोनों में हमें खास अंतर यह देखने को मिलता है कि Modem आपको सीधे इंटरनेट से कनेक्ट करता है जबकि Router मॉडम से इंटरनेट लेकर आपको Wi-Fi के द्वारा इंटरनेट से जोड़ता है।

  • NOC

इसको हम सभी Network operation center के नाम से जानते हैं यह सारी सैटलाइट इंटरनेट सिग्नल को control करता है जैसे कि सिग्नल समस्या पर नजर रखना, पावर समस्या इत्यादि चीजों पर यह कंट्रोल करता है।

  • Ground Station

यह हमारे द्वारा सर्च की गई जानकारी को सेटेलाइट से मुख इंटरनेट यानी नेटवर्क ऑपरेशन सेंटर को देता है और मुख इंटरनेट हमारे द्वारा सर्च की गई जानकारी को सेटेलाइट को देता है कहने का मतलब यह है कि यह Data Signal को आपस में भेजने का काम करता है और यह ठीक टेलीफोन एक्सचेंज की तरह काम करता है।

Satellite Internet companies list पूरे विश्व या संसार में सैटलाइट इंटरनेट कौन-कौन दे रहा है

  • SpaceX

अंतरिक्ष जगत की टेक्नोलॉजी में क्रांति लाने वाले Elon musk की कंपनी स्पेसएक्स ने USA और कनाडा में 4400 satellite इनकी दूसरी कंपनी starlink Satellite broadband इंटरनेट सर्विस देने की शुरुआत कर दी है।

  • Airtel

एयरटेल ने भी oneweb की सहायता से विश्व स्तर पर सेटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट सर्विस देने की सुविधा शुरू कर दी है क्योंकि इन्होंने अंतरिक्ष में अपनी सेटेलाइट भेजना भी शुरू कर दिया है।

इससे हमें जल्द से जल्द सैटलाइट इंटरनेट की सुविधा देखने को मिलेगी एयरटेल के द्वारा खासकर भारत देश में क्योंकि एयरटेल के users इसका लाभ जरुर उठाएगे ।

  • Amazon

Amazon इसका इस्तेमाल हम सभी ने कभी ना कभी किया ही होगा और इन्हीं के द्वारा अब project kuiper के द्वारा satellite internet broadband सुविधा देने की कोशिश जल्द से जल्द की जा रही है।

भारत में Satellite internet कब तक आ जाएगा।

BharatNet परियोजना जो भारत सरकार द्वारा सेटेलाइट ब्रॉडबैंड नेटवर्क पर काम कर रही है इसकी मदद से भारत सरकार सीमा क्षेत्रों, नक्सल प्रभावित राज्यों, दीप क्षेत्रों और ग्राम पंचायतों को आपस में जोड़ने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

भारत सरकार के Hughes Communication द्वारा कहा गया है कि वह सेटेलाइट ब्रॉडबैंड की सुविधा 5,000 ग्राम पंचायतों पूर्वोत्तर राज्यों जैसे Manipur, Meghalaya, Arunachal Pradesh, Mizoram में इंटरनेट सेटेलाइट के द्वारा जल्द से जल्द उपलब्ध हो जाएगी।

इसके साथ-साथ हमारे पूर्वी लद्दाख, अंडमान निकोबार और लक्ष्यदीप में भी जल्द से जल्द ब्रॉडबैंड इंटरनेट की सुविधा दी जाएगी।

सैटलाइट इंटरनेट के फायदे क्या है ?

  1. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह जगह-जगह उपलब्ध होगा।
  2. दूरदराज के इलाकों में भी इंटरनेट की सुविधा देखने को मिलेगी खासकर ग्रामीण इलाकों के छात्रों को पढ़ने में भी काफी मदद मिलेगी।
  3. सेटेलाइट इंटरनेट में हमें अधिक इंटरनेट स्पीड देखने को मिलेगी इसके अंदर हमें कम से कम 25 Mbps से 30 Mbps तक डाउनलोड स्पीड देखने को मिलेगी।
  4. जैसा हम जानते हैं कि सैटलाइट इंटरनेट में कोई भी Cable wire की जरूरत नहीं होती है अगर कोई बाढ़, भूकंप यानी प्राकृतिक आपदा आती है तो उस समय भी हमारा इंटरनेट चलता है।
  5. हमारे देश के जवानों को भी इंटरनेट की सुविधा देखने को मिलेगी यह उन सभी जवानों के लिए एक वरदान से कम नहीं होगा कि वह इंटरनेट का इस्तेमाल कर सकते हैं।

Satellite internet के नुकसान क्या-क्या है ?

  • सैटलाइट इंटरनेट cable internet से महंगा पड़ता है।
  • यह VPN यानी वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क का समर्थन नहीं करता है।
  • Dish हमेशा दक्षिण दिशा में लगाना होता है अगर हम दक्षिण दिशा में dish लगाते हैं और कोई बिल्डिंग या पेड़ आता है जो सिग्नल को रोकता है जिससे इंटरनेट की स्पीड को धीरे हो जाती है।
  • सैटलाइट इंटरनेट का price महंगा होता है।
  • अगर इसमें इंटरनेट धीरे चलता है तो हम केवल ब्राउज़िंग ही कर सकते हैं।
  • अभी फिलहाल इसके अंदर ऑनलाइन गेमिंग दूर की सोच है।

Conclusion – Satellite internet kya hai क्यूँ है इतना खास जानिए ?

हमें उम्मीद है कि Satellite internet kya hai क्यूँ है इतना खास जानिए ? के बारे में आपको जानकारी मिली होगी अगर हां तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ भी शेयर करें और हमारे Youtube Channel और Blog को बिल्कुल फ्री में सब्सक्राइब कर ले जिससे भविष्य में आने वाली ऐसे महत्वपूर्ण जानकारियां आपको मिलती रहे |

Himanshu

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